खरि च ८।४।५५॥

झलों का चर् होता है खर् में।

यरोऽनुनसिकेऽनासिको वा ८।४।४५॥

यर् का अनुनासिक में अनुनासिक विकल्प से होता है।

ष्टुना ष्टुः ८।४।४१॥

स्तु का ष्टु से ष्टु होता है।